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Unknown Story

Текст на Статията

  • आज इस स्थान को खाटू मंदिर के नाम से जाना जाता है। जहां पर बर्बरीक की खाटू श्याम के रूप में पूजा की जाती है।
  • बर्बरीक के इस अच्छे निर्णय के कारण मेँ उसे एक वरदान देता हूँ कि कलयुग में लोग उसे मेरे अवतार की तरह पूजेंगे.
  • भगवान श्री कृष्ण बर्बरीक के बारे मे जानते थे। उन्हे पता था की अगर बर्बरीक युद्ध भूमि मे आया तो वह एक तीर से ही युद्ध खत्म कर देगा।बर्बरीक हारती हुई सेना का साथ देता। और उस समय कौरव हार रहे थे। तो इससे निश्चय था की पांडव हार जाएंगे। इस लिए उन्होने एक युक्ति अपनाई।
  • साधु का भेष बदलकर भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन के साथ बर्बरीक से मिलने पहुंचे। बर्बरीक युद्ध के लिए निकलने ही वाले थे.
  • तुम्हारे तरकश मे तो सिर्फ तीन ही बाण है। अगर तुम श्रेष्ठ धनुर्धर हो, तो इस पीपल के पेड़ की सभी पत्तियों को एक तीर से ही गिराकर दिखाओ।
  • अभी देखिये आपकी चुनौती स्वीकार है।
  • कुछ क्षणों में सभी पत्ते गिराकर तीर श्रीकृष्ण के पैरों के पास चक्कर लगाने लगा।बर्बरीक की तीरंदाजी का पता करने के लिए श्रीकृष्ण ने चुपके से एक पत्ता अपने एक पैर के नीचे दबा लिया था। यह बर्बरीक को समझ आ गया था।
  • कृपया आप अपना पैर पत्ते पर से हटा लें ताकि तीर अपना काम पूरा कर सके।
  • मैंने अपनी माँ से वादा किया है की जो पक्ष हारेगा मैं उस पक्ष से युद्ध लड़ूँगा।
  • तुम्हारे अंदर कौशल तो है। तुम युद्ध लड़ने जा रहे हो, परंतु तुम किस पक्ष से लड़ोगे?
  • श्री कृष्ण दोबारा ब्राह्मण के भेष मे बर्बरीक के पास गए और दक्षिणा मे उनका सर मांग लिया। बर्बरीक बात के धनी और वचन के पक्के भी थे।
  • शीश काटने से पहले आप एक बार अपने वास्तविक रूप के दर्शन दे दें।
  • मैं कटे सिर के साथ ही पूरा महाभारत का युद्ध देखना चाहता हूँ।
  • तुम्हारी इच्छा स्वीकार है। तुम्हारी कोई और इच्छा है?