किसी गाँव में एक चिड़ीमार रहता था | उसने एक बाज पाला था | शिकार करते समय जब भी चिड़िया को उड़ते देखता तो उस पर बाज छोड़ देता और बाज उस चिड़िया को मार लेता | इसी तरह चिड़ीमार अपना जीवन निर्वाह करता था |
एक दिन चिड़ीमार शिकार की खोज में घूमता-फिरता ऐसे स्थान पर जा पहुंचा जहाँ पानी नहीं था चलते-चलते उसे प्यास लग आयी थी | बहुत खोज करने पर भी पानी कहीं नहीं मिला अंत में प्यास से बेचैन होकर वह एक वृक्ष की छाया में जा बैठा |
तीन बार चिड़ीमार ने दोना भरा और तीन बार बाज में गिरा दिया अब चिड़ीमार क्रोध से भड़क उठा उसने खंजर निकालकर बाज को मार डाला |
अब कब तक दोना भरेगा पेड़ पर चढ़कर जहाँ से पानी टपक रहा है वहीं से पीता हूँ |
ऊपर जाकर देखा तो वह कांप उठा एक कोटर में एक बड़ा अजगर मरा पड़ा था | उसकी देह सड़-गल गई थी उसमें से एक-एक बूंद पानी नीचे टपक रहा था | यह देखकर चिड़ीमार को बाज को मारने का बहुत दुख हुआ वह सिर पीटकर पछताने लगा कि इतने उपकारी बाज को क्यों अपने ही हाथों मार डाला |
जब सवेरा हुआ तो ठग का बड़ा बेटा उस कमरे में पहुँचा | वहाँ राजकुमार को और अपनी छोटी बहन को न देखकर वह चकरा गया |
राजकुमार जब घुड़साल पहुंचे तो उन्हें दुबली-पतली ऊँटनी को देखा परन्तु वो पसंद नहीं आई तो उन्होंने मोटी-ताज़ी ऊँटनी को खोलकर ले आए | जब ठगराज की छोटी बेटी ने देखा कि राजकुमार साठ कोस चलने वाली उठी ले आए हैं तो उसे खेद हुआ परंतु उसने सोचा कि ईश्वर जो करता है अच्छे के लिए करता है यह सोचकर वह राजकुमार के साथ सवार हो गए |
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