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प्राचीन काल में वनो कि स्तिथि

प्राचीन काल में वनो कि स्तिथि

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  • हाँ हाँ अभिप्षा ये बिलकुल सच हैं। चलो हम बाहर बगीचे में बैठकर इसके बारे में बात करते हैं।
  • यहा अभिप्षा और उसकी दीदी प्राचीन काल के वनो के बारे में बात कर रहे हैं।
  • दीदी मैं अपने इतिहास की पुस्तक में पढ़ रहीं थी कि प्राचीन काल में वनो को काटा नहीं जाता था। ये क्या सच हैं ?
  • आज जैसे मनुष्यों द्वारा वनों का दोहन होता आ रहा है, प्राचीन काल में लोग वनों के गुण गाते थे और वे पेड़ों कोअपने भगवान के रूप में पूजा करते थे।विष्णु पुराण में भी भारत में मौजूद वन का उल्लेख है। बृहद आरण्यक उपनिषद मेंमनुष्य की तुलना एक पेड़ से की गई है। जिसके बाल पत्ते हैं और जिसकी त्वचा पेड़ कीबाहरी छाल है।
  • अभ? अभी हम सब पेड़ काट रहे हैं जिससे हमारा देश से हरियाली काम होती जा रही हैं।
  • तुम्हे पता हैं अभिप्षा प्राचीन काल का वन बहुत सुन्दर था क्योंकि वहा पेड़ नहीं काटा जाता था और सब जगह हरियाली थी ।
  • और अभी ?
  • प्राचीन काल में पेड़ काटा नहीं जाता था इसलिए बहुत पशु-पक्षीको रहने के लिए स्थान मिलता था। उस समय परिस्थिति का संतुलन भी ठीकठाक बनाए रखाजाता था।
  • अभ हमसब पेर काटके सड़कें और बड़े बड़े इमारतें बना रहें हैं।पेड़ के अनुपस्थितीसे हमारे शहर में प्रदूषण बढ़ गया हैं।
  • शाबाश !
  • दीदी, अबसे अगर मैं किसी को पेड़ काटते देखु तो मैं उसे रोकने की कोशिश करुँगी।