वह सिर पीटकर पछताने लगा की इतने उपकारी बाज को क्यों अपने ही हाथों मार डाला। वह चीड़िमार जीवन-भर उस दुख को न भुल सका।
उसने सोचा: सौ कोस चलने वाली ऊँटनीतो वे ले गए हैं, दूसरी ऊँटनी पर इनका पीछा करता हूँ। जब दूसरी ऊँटनी के पास गया गया, तो उसने माथा पीट लिया, वह ऊँटनी लंगड़ी हो चुकी थी।
उन्होंने राजकुमार का ठगराज की छोटी बेटी से विवाह कर दिया। वे स्वयं बूढ़े हो गए थे, अतःउन्होंने राजकुमार का राजतिलक कर दिया। मंत्री का पद भी मंत्री के पुत्र को दे दिया गया।
यह सुनते ही राजकुमार झट से उस ऊँटनी पर कूद पड़ा, जिस पर ठग की पुत्री बैठी थी। राजकुमार और ठगराज की पुत्री की छोटी बेटी दोनों सौ कोस चलने वाली ऊँटनी को भगाकर ले गए। ठग का पुत्र जब तक पेड़ से नीचे उतरता तब तक वे काफ़ी दूर निकल गए थे।
मित्र, घर पर रहकर भी क्या किसी को ज्ञान प्राप्त हुआ है?