दिए जल उठे

दिए जल उठे

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  • ताकि लोगों को कीचड़ और दलदल में कम चलना पड़े|रात के अंधेरे में गांधी जी ने 4 किलोमीटर की दलदली जमीन चले | कुछ ने सलाह दी कि वह गांधी जी को उनके कंधे पर उठा ले | गांधी जी ने मना कर दिया गांधी जी ने यह कहा कि धर्म की यात्रा है चलकर ही पार कर लूंगा |
  • सरदार पटेल और नेहरू की जय गांधीजी, 
  • रात में अंधेरा भरने के कारण छोड़ दिए से कुछ साफ नहीं आ रही थी तभी गांव के लोगों ने रात में अंधेरा भरने के कारण छोटे दिए से कुछ रोशनी साफ नहीं आ रही थी तभी गांव के लोगों ने हजारों दिए लोग हजारों खड़े थे |
  • यही नजारा नदी की दूसरी तरफ था | लोग दिए लेकर गांधी जी और सत्याग्रह का इंतजार कर रहे थे |
  • धन्यवाद
  • गांधीजी नाव पर गए | उसके बाद नारे लगने लगे | गांधीजी, सरदार पटेल और नेहरू की जय | महानदी की दूसरी तरफ बहुत कीचड़ था |
  •  गांधीजी उसी कीचड़ में चलते है रात को 1:00 तक नदी के उस पार पहुंचते हैं |वहां पहुंचकर पहले ही तैयार हुई झोपड़ी में जाकर आराम करने लगे| अभी भी लोग दिए लेकर खड़े थे उनको पता था कि सत्याग्रही अभी भी नदी पार कर कर आएंगे |
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