Unknown Story

Updated: 9/14/2021
Unknown Story

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  • तंतारा - वामीरो की कथा
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  • तंतारा - वामीरो की कथा
  • पशु पर्व
  • वामीरो !!!
  • पशु पर्व
  • तंतारा - वामीरो की कथा
  • वामीरो!! तुम......
  • पशु पर्व
  • उस दिन के बाद दोनों हर दिन एक दुसरे से मिलने लगे।दोनों एक दुसरे को घंटो तक निहारते रहते थे। दोनों को एक दुसरे से प्रेम हो गया।
  • तंतारा - वामीरो की कथा
  • पशु पर्व
  • कुछ दिनों बाद पासा गाँव में 'पशु-पर्व' का आयोजन किया गया। वर्ष में एक बार सभी गाँव के लोग इस दिन होने वाली प्रतियोगिताओं में भाग लेते है। तंतारा भी इस प्रतियोगिता में भाग लेता था। पर इस बार उसकी नज़रें बस वामीरो को खोजने में व्यस्त थी।
  • तंतारा - वामीरो की कथा
  • तंतारा की नज़रें वामीरो को ढूंढ रही थी, तभी थोड़ी दूर उसे कोई झांकता दिखा; वह उस व्यक्ति को पहचानने के लिए निकट गया तो उसे पता चला की वह वामीरो ही थी। वामीरो, तंतारा को देख कर फुटकर रोने लगी।ताँतारा के कुछ कहने पर उसकी आवाज़ लगातार ऊँची होती जा रही थी।
  • तंतारा - वामीरो की कथा
  • द्वीप दो टुकड़ो में विभक्त हो गया। तंतारा को जैसे ही होश आया उसने देखा की वामीरो द्वीप के दुसरे तरफ थी और उसका द्वीप समुद्र में धसने लगा था। उसने झटपटाकर दुसरे तरफ जाने के लिए छलांग लगाई। वह निचे की तरफ फिसलने लगा। यहाँ तंतारा, वामीरो का नाम चीख रहा वामीरो, तंतारा का।
  • वामीरो के स्वर को सुनकर उसकी माँ वहां पहुंची और दोनों को देखकर आग बबूला हो गयी।उन्होंने तंतारा को तरह-तरह से अपमानित किया। गाँव के लोगो ने भी विरोध में अपनी आवाज़ उठायी। यह तंतारा के लिए असहनीय हो गया था।
  • यह सही नहीं है !!!
  • तुम्हे इतनी भी शर्म नहीं आयी।दुसरे गाँव की युविका से संबंध रखते हो !!
  • वामीरो के लगातार रोने और लोगो के उसे अपमानित करे जाने के कारण तंतारा भी गुस्से से भर उठा। उसने अपनी तलवार उठायी और गुस्से से धरती में घोंप दी और उसे खींचने लगा।एक गड़गड़ाहट सी गूंजने लगी और धरती दो टुकड़ो में फटने लगी। गाँव के लोग घबराए हुए थे। वह अपनी तलवार को खींचते-खींचते धरती के अंतिम सिरे तक पहुंच गया।
  • आ.!.!
  • उस दिन के बाद तंतारा का कोई पता न मिला।वामीरो भी अपने परिवार से एक तरह से विलग हो गयी और कुछ समय पश्चात उसका भी कोई सुराग नहीं मिला।