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Samvaad Lekhan

نص القصة المصورة

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  • अरे माधव! तुमसे मिलके कितने दिन हो गए दोस्त!
  • अरे अजय! तुमसे मिलके बहुत ख़ुशी हुआ मित्र। तुम्हारे गर्मी की छुट्टियाँ कैसे गुज़रे?
  • हम इस बार कही नहीं गए माधव। इन छुट्टियों में मैंने एक ग्रीष्मकालीन शिविर में भाग लिया था। ये बताओ, तुम्हारी छुट्टियाँ कैसी थी? तुम कहाँ-कहाँ घूमें और क्या-क्या देखा?
  • अरे! ये तो कमाल की बात हुई! मेरी भी छुट्टियाँ बहुत मज़ेदार थी। मैं इस बार अपने दादा-दादी के साथ रहने केरल के पालघाट गया था।
  • ओ! दादा-दादी तो फूले न समा पाए होंगे। पालघाट के बारे में ज़रा विस्तार से बताओ दोस्त।
  • बिलकुल! पालघाट केरल के एक सीमावर्ती जिला हैं। पालघाट प्राकृतिक सौंदर्य केलिए बहुत प्रसिद्द हैं। इसके एक तरफ पश्चिम घट पर्वत श्रृंखला हैं। इधर घने जंगल और झरनों के साथ-साथ खेतें और कई नदियाँ भी हैं।
  • अरे माधव, ये सब सुनके तो वहां ज़रूर जाने का मन कर रहा है।
  • यहां स्थित परम्बिकुलम टाइगर रिजर्व और साइलेंट वैली नेशनल पार्क, कई पर्यटकों को आकर्षित करता हैं।वहां हमें जानवरों, पक्षियों तथा पेड़ों की कई अज्ञात किस्में देखने को मिलते हैं। उधर की सवारी बहुत लुभावनी हैं।
  • ये सब इतने विस्तार से बताने केलिए धन्यवाद माधव। मैं घर जाके माँ-बाप को पालघाट के बारे में ज़रूर बतऊँगा।
  • इतना ही नहीं अजय, पालघाट में कई पौराणिक मंदिर और टीपू का बनाया हुआ एक प्रसिद्द किला भी है।यहाँ की लोक-संगीत एवं कल्पाती अग्रहार के रथोलसव बहुत मशहूर है।
  • मुझे खुशी है कि तुम्हे पालघाट के बारे में जानकर अच्छा लगा। भारत में हर जगह की अपनी परंपरा, संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता है। इस वर्ष हमारी सामाजिक अध्ययन पुस्तक में ऐसे कई स्थानों का उल्लेख है।
  • सही कहा माधव!