तुम यहां रहते थे, लेकीन अब यहां मे रहता हूं और इसलए यह मेरा घर है।”
बहुत पुरानी बात है, एक जंगल मै एक बहुत बड़े पेड़ के तने मे एक खोल था। उस खोल मे किपजंल नाम का एक तीतर रहा करता था। हर रोज वह खाना ढूंढने खेतो मे जाया करता था और शाम तक लौट आता था।
ये मेरा घर है। निकलो यहां से।”
एक दिन खाना ढूंढत-ेढूंढते किपजंल अपने दोसतो के साथ दरूͩकसी खेत मे निकल गया और शाम को नहि लौटा। जब कई दिनतक तीतर वापस नहहआया, तो उसके खोल को एक खरगोश ने अपना घर बना ͧलया और वही रहने लगा।लगभगदो से तीन हफ्ते बाद तीतर वापस आया।
इस तरह दोनो के बीच बहस शुरू हो गई। तीतर बार-बार खरगोश को घर से निकलने के ͧलए कह रहा था और खरगोश अपनी जगह से टस से मस नही हो रहा था।
उनको बात सुनकरु बिली ने कहा, “अब मने हिस का रासता छोड़ दिया है, लेकिन मे तुमहारा मदद जरूरू करू गी। समèया यह है ͩक मे अब बूढ़ी हो गई हूं और इतने दरू से मुझे कुछ सनुई नहीं दे रहा ह
बिली मौसी, तुम समझदार लगती हो। हमारा मदद करो और जो भी दोषी होगा, उसे तुम खा लेना।”
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उन दोनो ने बिली की बात पर भरोसा कर ͧलया और उसके पास चले गए। जैसे ही वो उसके पास गए, बिली ने तुरंत पंजा मारा और एक ही झपटे मे दोनो को मार डाला।
इस तरह दोनो के बीच बहस शुरू हो गई। तीतर बार-बार खरगोश को घर से निकलने के ͧलए कह रहा था और खरगोश अपनी जगह से टस से मस नही हो रहा था।
“कै सा घर? कौन सा घर? का जंगल नियम है ͩक जो जहां रह रहा है, वहा उसका घर ह।
तब तीतर ने कहा ͩक इस बात का फै सला हम ͩकसी तीसरे को करने देते है।उन दोनो कि इस लड़ाई को दरू से एक बिली देख रही थी। उसने सोचा ͩक अगर फै सले के ͧलए ये दोनो मेरे पास आ जाएं, तो मुझे इन्हे खाने का एक अÍछा अवसर ͧमील जाएगा।
यह सोच कर वह पेड़ के नीचे धयान मुद्रा मेबैठ गई और जोर-जोर से गयान की बाते करने लगी उसकी बातो को सनु कर तीतर और खरगोश ने बोला ͩक यह कोई गयानी लगती है और हमे फै सले के ͧलए इसके ही पास जाना चाहिए।
सीख इस कहानी से हमे यह सीख ͧमलती है ͩक हमे झगड़ा नही करना चाहिए और अगर झगड़ा हो भी जाए, तो ͩकसी तीसरे को बीच मे आने नही देना चाहिए।
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