Siirry pääsisältöön
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Kuvakäsikirjoitus Teksti

  • एक समय की बात है एक गांव में एक व्यापारी रहता था। वह गांव-गांव जाकर टोपियां बेचा करता था। वह रोज सुबह एक बड़ी-सी टोकरी में टोपियां लेकर निकलता था। उन्हें बेचकर वह शाम तक अपने घर वापस आ जाता था। एक सुबह वह अपनी टोकरी में रंग-बिरंगी टोपियां लेकर निकला। एक गांव में टोपियां बेचने के बाद वह दूसरे गांव की ओर जा रहा था।
  • वह चलते-चलते बहुत थक गया था, इसलिए उसने जंगल में जाकर एक बरगद के पेड़ के नीचे आराम करने का फैसला किया, जिस पर कई शरारती बंदर रहते थे। उसने टोपियों की अपनी टोकरी अपने पास रखी और सो गया।
  • जैसे ही व्यापारी सो गया, बंदरों ने व्यापारी की टोकरी से टोपियाँ लीं और खेलना शुरू कर दिया। बंदरों के कूदने की आवाज आई तो व्यापारी जाग गया।
  • व्यापारी ने देखा कि उसकी सारी टोपियाँ टोकरी से निकल चुकी हैं। बंदरों को टोपी पहने देखकर व्यापारी चौंक गया। उसने बंदरों पर चिल्लाया और टोपी वापस पाने की बहुत कोशिश की, लेकिन कुछ नहीं हुआ। वह गुस्सा और तनाव में आ गया।
  • तब व्यापारी को एहसास हुआ कि बंदर भी वही हरकत कर रहे हैं जो वह खुद कर रहे थे। तो उसे एक विचार आया। उसने जो टोपी पहनी हुई थी उसे फेंक दिया। व्यापारी को देख वानरों ने भी अपनी टोपियां फेंक दीं। व्यापारी ने सारी टोपियां इकट्ठी कर लीं और घर जाने का फैसला किया।
  • यह कहानी हमें सिखाती है कि परिस्थिति कैसी भी हो हमें घबराना नहीं चाहिए। किसी भी मामले में हमें समझदारी से काम लेना चाहिए और ठंडे दिमाग से सोचना चाहिए।