Pāriet uz galveno saturu

साधू के तीन उपदेश

साधू के तीन उपदेश

Montāžas Teksta

  • ठगराज उसे साथ लेकर घर आ गया। वह राजकुमार को एक कमरे में ले गया और कहने लगा,“आप इस पलंग पर आराम से लेट जाइए। थोड़ी देर में खाना भेजूँगा।" राजकुमार ने देखा कि पलंग पर सफेद चादर बिछी हुई है। राजकुमार ने देखा कि पलंग पर सफेद चादर बिछी हुई है उसे साधु के दूसरे उपदेश की याद आई। उसने चादर उठाकर देखा, तो पलंग कच्चे सूत से बना हुआ था। उसके नीचे बहुत गहरा कुआँ था। राजकुमार यह देखकर सारी चालाकी समझ गया। उसने पलंग पर चादर उसी तरह बिछा दी, फिर वह जमीन पर ही चटाई बिछाकर बैठ गया।
  • ठगराज ने आकर यह देखा तो समझ गया कि मेरी यह चाल तो बेकार गई।
  • तब ठगराज ने कहा, "अच्छा, खाना तैयार हो गया है, भेज दूँ?" राजकुमार ने कहा, "हाँ, भेज दीजिए।"
  • १. राजकुमार,तुम पलंग पर क्यों नहीं लेटते?"
  • २. आज हमारे गुरुओं का दिन है। आज के दिन हम पलंग पर न बैठते हैं,न लेटते हैं। मैं यहाँ चटाई पर आराम से हूँ। आप चिता न करें।"
  • ठगराज ने विष मिलाकर नाना प्रकार के उत्तम व स्वादिष्ट व्यंजन तैयार करवाए। फिर उन्हें राजकुमार के सामने परोसकर वह चला गया।
  • राजकुमार के बहाने,थोड़ी-थोड़ी सब चीज़ लीं और सड़क पर लाकर एक कुत्ते पूजा के आगे डाल दो। खाते ही कुत्ता चित होकर गिरा और मर गया। राजकुमार ने थाली उठाकर सारा भोजन एक गड्ढे में फेंक दिया और वरतन माँजकर रख दिए । ठगराज की यह चाल भी बेकार हो गई।