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दो मित्रों के बीच पर्यावरण पर संवाद

दो मित्रों के बीच पर्यावरण पर संवाद

Montāžas Teksta

  • मित्र मनीष कैसे हो?
  • मैं ठीक हूँ, तुम बताओ कहाँ जा रहे हो सुबह सुबह?
  • मैं पास के पार्क में घूमने जा रहा हूँ I तुम भी चलोगे मेरे साथ?
  • हाँ हाँ चलो, दिन भर तो प्रदूषण में ही रहना पड़ता है I सुबह सुबह का ही समय होता है जब स्वच्छ वायु में सांस ले पाते हैं I
  • जैसे जैसे दिन चढ़ता जाता है, यातायात भी बढ़ता है और प्रदूषण भी I इसलिए सुबह सुबह प्रतिदिन मैं तो स्वच्छ वायु में घूमने निकल जाता हूँ I दिल्ली के प्रदूषण भरे वातावरण में केवल यही समय होता है जब व्यक्ति स्वच्छ वायु में सांस ले पाते है I
  • तो भाई यह प्रदूषण फैलाया किसने है? हमारे और तुम्हारे जैसे लोगो ने I अगर लोग समझदारी से काम ले तो इस प्रदूषण से बचा जा सकता है और पर्यावरण को भी स्वच्छ बनाया जा सकता है और यह तो सबका कर्त्तव्य है कि पर्यावरण को स्वच्छ रखा जाए और इसके लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाए जाने चाहिए I
  • इस विषय में दिल्ली सरकार ने बहुत ही प्रशंसनीय कदम उठाया था, ओड इवन के आधार पर गाडी चलाने का I यह प्रदूषण को घटाने के लिए बड़ा ही कारगर कदम है I वरना तो एक एक व्यक्ति एक एक गाडी लेकर चलता है I
  • मैं तो कहता हूँ यह नियम हमेशा के लिए लागू रहना चाहिए I इससे सड़को पर बेवजह की कटौती होगी और पर्यावरण की भी रक्षा होगी I
  • सत्य कहते हो मित्र I अगर यह नियम हमेशा के लिए लागू कर दिया जाए तो बहुत ही अच्छा होगा, प्राणी मात्र के लिए भी और पर्यावरण के लिए भी I
  • पर्यावरण का रखे ध्यान, तभी बनेगा देश महान !