Pāriet uz galveno saturu

venka ki chithi

venka ki chithi

Montāžas Teksta

  • क्रिसमस से पहली शाम थी। नौ वर्षीय बालक वेनका दिनभर के काम के बाद भी, पेशे से मोची आपने मालिक आलियाखिन और उसकी पत्नी के गिरजाघर का इंतज़ार कर रहा था।
  • मालिक कब जायेंगे ?
  • मालिक के जाते ही, वेनका अलमारी से स्याही की दावत , घिसी निब्वला डोल्डर और कागज को ज़मीन पे रख कर लिखने बैठ गया ।
  • वे चोर की तरह सरे दरवाजे और खिड़की की ओर विस्फारित आखो से देखने लगा। तभी उसे आभास हुआ की उसे कोई देख रहा है।
  • मुझे कोई देख रहा है?
  • उसे याद आया, वह अपने दादा जी के साथ क्रिसमस पेड़ लाने जाता था। जब कभी वह बरफ़ में लुढ़क जाता तो दादा जी ठहाके लगाकर हँसते और फिर लपककर गोद में उठा लेते थे। दादा जी क्रिसमस पेड़ काटते - काटते वेनका को खूब हँसाते। सहसा कोई खरगोश वहाँ से गुज़रता तो वे चिलाते - वेनका, पकड़ो इस छोटी दुमवाले शैतान को ! , दादा जी क्रिसमस पेड़ मालिक के घर तक लाते। मालिक की लड़की और दादा जी सब पेड़ सजाने में जुट जाते।
  • वेनका, पकड़ो इस छोटी दुमवाले शैतान को !
  • वेनका की आँखों के आगे अपने दादा कांस्टेनटाइन का चित्र स्पष्ट हो आया। छोटा-सा दुबला-पतला पैंसठ साल का वृद्ध। परिश्रम और चुस्ती से कोठी की चौकीदारी करता कांस्टेनटाइन। अत्यंत मुस्तैदी से कार्य में निमग्न, कर्मनिष्ठ।
  • वेनका ने लिखा - दादा जी, ईश्वर के लिए मुझे ले जाओ। अब और नहीं लिखा जाता। मेरा हाथ दर्द कर रहा है। अब आपका इंतज़ार है। आपका पोता। गाँव को, मेरे दादा कांस्टेनटाइन के पास। उसने पत्र को अपनी जेब में रखा और सड़क की ओर दौड़ा। वेनका ने चिट्ठी को डाक के डिब्बे में डाल दिया। घर आकर वह सो गया। उसे सपना आया चिमनी के पास खड़े उसके दादा जी अपनी साथियों को उसकी चिट्ठी पढ़कर सुना रहे हैं।