नमस्ते बच्चों आज हम वीर कुंवर सिंह के व्यक्तित्व के बारे में बातें करेंगे।
बच्चे-जी मैम उन्होंने अंग्रेजों की गुलामी से आजादी दिलाने का पूर्ण रूप से प्रयास किया था ।
सानवी गुप्ता-वीर कुंवर सिंह में देश भक्ति और प्रेम की भावना कूट-कूटकर भरी थी।
अध्यापिका - सही, और वह पढ़ने लिखने में कैसे थे?
प्रियांशी-उन्होंने हिंदी संस्कृत और फारसी सीखी थी।
मोदीत-लेकिन मैम उन्हें पढ़ने लिखने से से अधिक ज्यादा उनका मन घुड़सवारी, तलवारबाजी और कुश्ती लड़ने में लगता था।
अध्यापिका-बच्चों क्या तुम्हें पता है उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन ८० वर्ष की उम्र में किया था।
इशिका-मैम वह बहुत चतुर भी थे क्योंकि उन्होंने अफवाह फला दी कि वे अपनी सेना को बंलिया के पास हाथियों पर चढ़ा कर पार करेंगे परंतु वह 7 मील दूर शिवराज नामक स्थान पर अपनी सेना को नाव के द्वारा गंगा पार करा रहे थे।
जयेश-जी मैम वीर कुंवर सिंह बहुत साहसी थे क्योंकि उन्होंने अपना बाएं हाथ काट कर गंगा मैया को अर्पित कर दिया।
सही वह चतुर के साथ साहसी भी थे। जयेश तुम बताओ कि वह साहसी कैसे थ?
अध्यापिका-मुझे आशा है कि आप सभी बच्चों को आज का पाठ पसंद आया हो। कल हम बसंत में वीर कुंवर सिंह के बारे में पड़ेंगे ।धन्यवाद।